Pt. Ramadhar J.Tiwari College of Polytechnic

polytechnic course

पॉलिटेक्निक-कोर्स

इस आर्टिकल में आप जानेंगे कि Polytechnic kya hota hai और polytechnic से जुडी बहुत सी जरुरी जनकारी आपको मिलेगी | जब एक बच्चा पढ़ाई करता है तो उसके और उसके पेरेंट्स के मन में यह सवाल जरूर आता है कि उसे आगे चलकर क्या करना है और कैसे सक्सेसफुल इंसान बना जा सकता है ?

इन्हीं सारी बातों के चलते आपके दोस्त, आपके फैमिली मेंबर आपको पॉलिटेक्निक करने की सलाह देते हैं और कहते हैं कि पॉलिटेक्निक वालों के लिए बहुत अच्छा स्कोप है |

पॉलिटेक्निक, एक टेक्निकल कोर्स है ,जो डिप्लोमा कोर्स होता है। यह एक काफी पॉपुलर कोर्स है ,जिसे 10th या 12th पास करने के बाद में कर सकते हैं। पॉलिटेक्निक का मतलब ही होता है–  इंजीनियरिंग मे डिप्लोमा (Diploma in Engineering). इस कोर्स के अंतर्गत कई ब्रांच की पढ़ाई कराई जाती है। यह जूनियर लेवल इंजीनियर को तैयार करने का एक तरीका है। बीटेक करने वाले लोग डिग्री हासिल करते हैं। वहीं पॉलिटेक्निक से डिप्लोमा की पढ़ाई करने वाले छात्रों को डिप्लोमा का सर्टिफिकेट दिया जाता है। जिसके बाद उन्हें जूनियर इंजीनियर के पद पर नियुक्त करके नौकरी दी जाती है।

12 वीं के बाद पॉलिटेक्निक कोर्स कैसे करे?

पॉलिटेक्निक का कोर्स 12 वीं पास करने के बाद भी कर सकते हैं, लेकिन सबसे लाभदायक होगा कि पॉलिटेक्निक कोर्स कक्षा 10वीं के बाद ही किया जाए। क्योंकि पॉलिटेक्निक प्रवेश परीक्षा में कक्षा 10वीं स्तर के प्रश्न पूछे जाते हैं। पॉलिटेक्निक पाठ्यक्रम परीक्षा के लिए कक्षा 10वीं के बाद पॉलिटेक्निक प्रवेश परीक्षा के फॉर्म भर सकते हैं। हर राज्य में पॉलिटेक्निक प्रवेश परीक्षा फॉर्म हर साल निकाला जाता है। यदि पॉलिटेक्निक कोर्स की परीक्षा अच्छे अंकों के साथ पास करने के बाद आप कॉलेज में प्रवेश ले सकते हैं। इसलिए अच्छे अंकों के साथ इसे पास करना आवश्यक हो जाता है।

पॉलिटेक्निक डिप्लोमा के लाभ

    • पॉलिटेक्निक में डिप्लोमा करने के वैसे तो स्टूड़ेट्स को कई फायदे होते है ,जो आगे चलकर उनके करियर में उनको काफी मदद भी करते हैंं। ऐसे ही कुछ लाभ नीचे दिए गए हैं।
    • इसे करने के बाद आपको एक टेक्निकल सर्टिफिकेट हासिल होता है।
    • पॉलिटेक्निक के आधार पर आपको तुरंत जॉब भी मिल जाती है।
    • इसके बाद आप जूनियर इंजीनियर बन जाते हैं और जूनियर इंजीनियर के पद के लिए अप्लाई कर सकते हैं। इसके अलावा, लोको पायलट टेक्निकल असिस्टेंट, और बहुत सारे सरकारी पदों के लिए भी आवेदन कर सकते हैं।
    • यह इंटरमीडिएट के बराबर की मान्यता प्राप्त होता है।
    • अगर आप डिप्लोमा की पढ़ाई अच्छे ढंग से करते हैं, तो आपकी समझदारी इंटरमीडिएट किए हुए छात्र से ज्यादा होती है और इसके अलावा ज्ञान भी ज्यादा होता है।
    • साधारण रूप से इंटरमीडिएट करने वाले छात्र जिस सरकारी जॉब के लिए अप्लाई कर सकते हैं। उसी जॉब के लिए डिप्लोमा छात्र अप्लाई कर सकते हैं।
    • बीटेक करने के लिए जाते हैं तब से सीधे सेकंड ईयर में एडमिशन मिल जाता है।
    • इंजीनियरिंग के क्षेत्र में कामयाब होने के लिए एक सही रास्ता है।
    • जब आप डिप्लोमा करके इंजीनियरिंग करने के लिए जाते हैं, तो आपको काफी आसान होता है।
    • पॉलिटेक्निक कोर्स के प्रकार
    • भारत में, पॉलिटेक्निक कॉलेजों को नौकरी उन्मुख डिप्लोमा पाठ्यक्रम प्रदान करने के लिए जाना जाता है। इन डिप्लोमा कोर्स को दो प्रकारों में बांटा गया है–

तकनीकी डिप्लोमा पाठ्यक्रम (डिप्लोमा इन इंजीनियरिंग) || गैर-तकनीकी डिप्लोमा पाठ्यक्रम

पॉलिटेक्निक कोर्स लिस्ट

दुनियाभर के विश्वविद्यालयों और संस्थानों में पढ़ाये जाने वाले कुछ पॉलिटेक्निक कोर्स  की सूची निम्नलिखित हैं।

 इस सूची में हमने उन विभिन्न कोर्सेज को शामिल किया है, जो शॉर्ट टर्म एजुकेशनल प्रोग्राम करने वालों के बीच लोकप्रिय है।

डिप्लोमा इन कंप्यूटर प्रोग्रामिंग

यह 2 वर्षीय डिप्लोमा प्रोग्राम कुछ कंप्यूटर प्रोग्रामिंग लैंग्वेजेज पर फोकस करता है ,जो कम्प्यूटेशनल डिवाइस में ऑपरेटिंग सिस्टम और कुछ एप्लीकेशन के सुचारू रूप से चलने में मदद करता है। ये कोर्स java, C#, .NET, Oracle और SQL जैसे प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का ज्ञान और मोबाइल तथा कंप्यूटर उपकरणों में हाल में हुई तकनीकी प्रगति पर विशेष जोड़ देते हुए छात्रों को सिखाता है।

पॉलिटेक्निक केमिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा कोर्स

केमिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा 3 साल की अवधि का एक पॉलिटेक्निक कोर्स है जिसे 10 वीं कक्षा के बाद छात्रों द्वारा किया जा सकता है। बता दें कि 10वीं करने के बाद कुछ छात्र ऐसे होते हैं जो कि 12वीं करने के बजाए सीधा कोई डिप्लोमा कोर्स करकर जल्दी नौकरी पाना चाहते हैं। तो आइए आज के इस आर्टिकल में हम आपको पॉलिटेक्निक केमिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा के बारे में बताना जा रहे हैं जो कि आप 10वीं के बाद आसानी से कर सकते हैं।

पॉलिटेक्निक केमिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा क्या है?


केमिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा देश में उपलब्ध कई इंजीनियरिंग डिप्लोमा के विकल्पों में से एक है और जैसा कि नाम से पता चलता है कि यह डिप्लोमा कोर्स केमिकल इंजीनियरिंग की मूल बातें सिखाने से संबंधित है।

      • इस कोर्स में माइक्रोबायोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री और बायोलॉजी की तरह ही फिजिक्स और केमिकल साइंस जैसी चीजें पढ़ाई जाती है।
      • इस अकादमिक कोर्स का मुख्य लक्ष्य इंडस्ट्री की विभिन्न धाराओं में रासायनिक विज्ञान का अनुप्रयोग है जहां कच्चे माल से नए रूपांतरित उत्पादों में रूपांतरण होता है।
      • यह क्षेत्र को विनियमित करने और रिफाइन प्रोडक्ट्स के विकास में संभावनाओं का विश्लेषण करने के लिए गणित और आर्थिक गणनाओं को लागू करने का एक व्यापक अध्ययन है।
      • इस कोर्स में एप्लाइड केमिस्ट्री, थर्मोडायनामिक्स, केमिकल टेक्नोलॉजी, हीट ट्रांसफर और बहुत कुछ शामिल है जो छात्रों के क्षेत्र को व्यापक स्वरूप देता है।
      • इस कोर्स को पूरा करने के बाद, छात्र उत्पादन, रिसर्च लैबोरेट्रीज, विश्लेषकों, पेट्रोलियम रिफाइनरियों आदि में प्रवेश कर सकते हैं। केमिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा प्राप्त करने वाले छात्र भी एक प्रवेश परीक्षा देने के बाद संबंधित इंजीनियरिंग शाखा के दूसरे वर्ष में दाखिला ले सकते हैं।

केमिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा करने के बाद स्कोप


केमिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा करने के बाद कई क्षेत्रों में नौकरी के अवसर उपलब्ध हैं जो ऐसे व्यक्तियों की तलाश करते हैं जिन्होंने अपना कोर्स पूरा कर लिया है। केमिकल इंजीनियरिंग कोर्स में डिप्लोमा का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्र अपने लिए एक पुरस्कृत कैरियर का निर्माण कर सकें। केमिकल इंजीनियरिंग कोर्स में डिप्लोमा का दायरा स्नातकों की विशेषज्ञता और कौशल को ध्यान में रखते हुए दिया जाता है। केमिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा नौकरी की तलाश करने वाले लोगों को दी जाने वाली कुछ शीर्ष नौकरियां हैं:

      • प्लांट ऑपरेटर
      • मार्केट एनालिस्ट
      • प्रोसेस इंजीनियर
      • एसोसिएटेड साइंटिस्ट
      • फिल्ड ऑपरेटर

डिप्लोमा इन सिविल इंजीनियरिंग कोर्स

पॉलिटेक्निक सिविल कोर्स के दौरान छात्रों को कंस्ट्रक्शन से जुड़ी कई तरह की बारीकियों को सिखाया जाता है।

यह कोर्स कंस्ट्रक्शन के बारे में है, और अलग-अलग तरह के कंस्ट्रक्शन टेक्निक्स और कंस्ट्रक्शन टर्म्स के बारे में छात्रों को इस कोर्स के दौरान पढ़ाया जाता है।

अलग-अलग तरह के कंस्ट्रक्शन जैसे कि सड़क, पुल, रेलवे, बिल्डिंग आदि के साथ-साथ कंस्ट्रक्शन मैटेरियल के बारे में भी पढ़ाया जाता है।

छात्र को वह सभी ज्ञान दिया जाता है जिससे वह सभी तरह के डायग्राम को समझ सके,  सर्वे का कार्य कर यह सुनिश्चित कर सकें कि कोई कंस्ट्रक्शन काम प्लानिंग के अनुसार ही हो रहा है।

 इस कोर्स के दौरान छात्रों को मैथमेटिक्स के कई पेपर पढ़ने होते हैं,  साथ में फिजिक्स, ग्राफिक और कंप्यूटर  ड्राइंग के भी पेपर पढ़ने होते हैं

इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग

Career In Electrical Engineering: क्या है इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग? यहां है जरूरी कोर्स योग्यता

Career Opportunities in Electrical Engineering: 12वीं पास करने के बाद अधिकांश छात्र मेडिकल और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते है। इंजीनियरिंग का क्षेत्र इतना व्‍यापक है कि कई बार छात्र कन्फ्यूज हो जाते हैं कि वे किस ट्रेड का चयन करें और किसमें करियर की अधिक संभावनाएं हैं। यदि आप भी इंजीनियरिंग के क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखते हैं, तो इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग ट्रेड का चयन कर सकते हैं, क्‍योंकि यह उन ट्रेड में शामिल है जहां पर करियर संभावनाएं और मांग सबसे अधिक है। इसका कारण है घर से लेकर औद्योगिक और स्पेस एप्लिकेंशस तक लगभग हर क्षेत्र में इलेक्ट्रि‍कल इंजीनियर की आवश्यकता बनी रहती हैं।

इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग क्या है (What is Electrical Engineering)
इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बिजली के नई टेक्नोलॉजी और बिजली के थ्योरी के बारे में जानकारी दी जाती है। बिना इलेक्ट्रिसिटी के कोई भी इंडस्ट्री नहीं चल सकती है। सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री, ऑटोमोटिव इंडस्ट्री, होम एप्लायंसेज सभी जगह इलेक्ट्रिसिटी की जरूरत पड़ती है। इसलिए इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में आपको बहुत सारे मशीन होम एप्लायंसेज, ऑटोमोबाइल मशीन व रोबोटिक्स के बारे में पढ़ाया जाता है।

मैकेनिकल प्रोडक्शन इंजीनियरिंग

What is Mechanical Production Engineering in Hindi-मैकेनिकल प्रोडक्शन इंजीनियरिंग क्या है?

अगर आप मैकेनिकल प्रोडक्शन इंजीनियरिंग में कोर्स करना चाहते हैं और इसके बारे में सारी डिटेल्स जैसे की मैकेनिकल प्रोडक्शन इंजीनियरिंग क्या है, मैकेनिकल प्रोडक्शन इंजीनियरिंग कोर्स करने के क्या फायदे हैं और मैकेनिकल प्रोडक्शन इंजीनियरिंग का सिलेबस,स्कोप और इसको करने के बाद जॉब और सैलरी क्या मिलती है इन सब चीजों को अच्छे से डिटेल्स में इस पोस्ट में कवर किया गया है।

मैकेनिकल प्रोडक्शन इंजीनियरिंग मैकेनिकल इंजीनियरिंग की आगे की शाखा है जो प्रबंधन के साथ-साथ निर्माण तकनीक से संबंधित है। मैकेनिकल प्रोडक्शन इंजीनियरिंग के पाठ्यक्रम में नए डिजाइन तैयार करना, उत्पादों की गुणवत्ता का विश्लेषण करना, किसी उत्पाद को उसके प्रबंधन के साथ योजना बनाना, यानी उत्पाद की बिक्री से संबंधित है।

मैकेनिकल प्रोडक्शन इंजीनियरिंग कोर्स का मुख्य फोकस लोगों की आवश्यकताओं को पूरा करना और उसके अनुसार उत्पाद को डिजाइन करना है। मैकेनिकल प्रोडक्शन इंजीनियर उन सभी उद्योगों में काम करते हैं जिनमें निर्माण गतिविधियाँ शामिल हैं। वे उद्योग में उत्पाद की निगरानी के लिए जवाबदेह हैं।

भारत में कई प्रतिष्ठित संस्थान हैं जो मैकेनिकल प्रोडक्शन इंजीनियरिंग में पाठ्यक्रम प्रदान करते हैं। यह क्षेत्र काम का विविधीकरण प्रदान करता है जहां किसी को उत्पाद विवरण और गुणवत्ता के विचारों को ध्यान में रखना होता है।

दरअसल, मैकेनिकल प्रोडक्शन इंजीनियरिंग कोर्स के लिए प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों या संस्थानों में दाखिले के लिए कई राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय परीक्षाएं आयोजित की जा चुकी हैं।

भारत और विदेश में मैकेनिकल प्रोडक्शन इंजीनियरिंग का दायरा

मैकेनिकल प्रोडक्शन इंजीनियरिंग क्षेत्र में, नौकरी प्रदान करने वाली कम्पनिया निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों से आते हैं। वे दिन गए जब इंजीनियर सिर्फ तकनीकी क्षेत्र में शामिल होते थे। समय विकसित हो गया है, और प्रोडक्शन मैकेनिकल इंजीनियर न केवल तकनीकी क्षेत्रों में काम करते हैं बल्कि प्रबंधन प्रथाओं को भी समझते हैं।

सरकारी स्तर पर भी, मैकेनिकल प्रोडक्शन इंजीनियरिंग स्नातक राज्य स्तर पर विभिन्न उत्पादन परियोजनाओं के कई हितधारकों के साथ काम करते हैं। इसलिए मैनेजमेंट और टेक्निकल दोनों कामों को ध्यान में रखते हुए मैकेनिकल प्रोडक्शन इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स की भर्तियां बढ़ रही हैं।

भारत में ही नहीं बल्कि अन्य विदेशी देशों में भी, शीर्ष स्तर के रिक्रूटर्स मैकेनिकल प्रोडक्शन इंजीनियरिंग स्नातकों को काम के व्यापक अवसर प्रदान करते हैं। दुनिया विकसित हो रही है, और इसलिए काम की जिम्मेदारियां भी हैं। इस प्रकार, कई संस्थान सिद्धांत और व्यावहारिक दोनों के संदर्भ में छात्रों को उन्नत ज्ञान प्रदान करने के महत्व को समझते हैं।

ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग मैकेनिकल इंजीनियरिंग

Automobile Engineering: क्यों अच्छा करियर ऑप्शन है ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग, ये हैं हाई सैलरी वाली जॉब्स

Automobile Engineering Course: ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग मैकेनिकल इंजीनियरिंग की एक विशेष ब्रांच है और कारों, वाहनों और उनके इंजन जैसे ऑटोमोटिव के डिजाइन और निर्माण creation के अध्ययन से संबंधित है। यह इंजीनियरिंग की वह ब्रांच है जो ऑटोमोबाइल के डेवलपमेंट, डिजाइनिंग, प्रोडक्शन, मैन्यूफक्चरिंग, टेस्टिंग, सर्विसिंग, मैनेजमेंट और कंट्रोल से संबंधित है। इसके कार्यान्वयन (implementation) के मुख्य फोकस क्षेत्र (prime focus areas) वाहन डिजाइन (vehicle design) कारों के उत्पादन में शामिल प्रक्रियाएं, मोटर इंजन के निर्माण और ईंधन प्रबंधन fuel management में हैं। इसके अलावा, ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, परिवहन इंजीनियरिंग (Transportation Engineering) इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग और सुरक्षा इंजीनियरिंग (Safety Engineering) सहित विभिन्न प्रकार की इंजीनियरिंग का एक अंतःविषय संयोजन (interdisciplinary combination) है। एक कुशल ऑटोमोबाइल इंजीनियर बनने के लिए आपको निम्नलिखित स्किल में महारत हासिल करने की आवश्यकता है

      • ग्रेट और इनोविटव डिजाइनिंग स्किल (सीएडी जैसे किसी भी डिजाइन सॉफ्टवेयर का उपयोग करके)
      • रिसर्च स्किल
      • पेट्रोल और डीजल इंजन के काम करने का व्यापक ज्ञान (Extensive knowledge)
      • तर्क कौशल (Argumentative Skills)
      • डिटेल पर अटेंशन Attention to Detail
      • प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल (Problem-solving skills)
      • लंबे और ऑड आवर्स के लिए काम करने की इच्छा (Willingness to work for long and odd hours)
      • मल्टी टास्किंग स्किल (Multi-tasking skills)

ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग कोर्स (Automobile Engineering Courses)

      • ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा / सर्टिफिकेट डिप्लोमा
      • मोटिव पावर टेक्निशियन में डिप्लोमा – ऑटोमोटिव (को-ऑप)
      • मेकाट्रोनिक्स और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा
      • ग्रेजुएट सर्टिफिकेट इन इंडसट्रीयल ऑटोमेशन
      • ऑटोमोटिव इंजीनियरिंग में न्यूजीलैंड सर्टिफिकेट

योग्यता


यदि आप इस क्षेत्र में सर्टिफिकेट प्राप्त करने के इच्छुक हैं, तो आपको अपने चुने हुए विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा करना होगा। पॉलीटेक्निक कोर्सेज के लिए कुछ सामान्य पात्रता इस प्रकार हैं–

      • 10वीं के बाद पॉलीटेक्निक कोर्स करने के लिए उम्मीदवारों ने किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं प्रथम श्रेणी से पास किया हो।
      • 12वीं के बाद पॉलीटेक्निक कोर्स करने के लिए उम्मीदवारों ने किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से PCM (फिजिक्स, केमिस्ट्री, गणित) से 12वीं प्रथम श्रेणी से पास किया हो।
      • विदेश की अधिकतर यूनिवर्सिटीज बैचलर्स के लिए SAT और मास्टर्स कोर्सेज के लिए GRE स्कोर की मांग करते हैं।
      • विदेश की यूनिवर्सिटीज में एडमिशन के लिए IELTS या TOEFL टेस्ट स्कोर, अंग्रेजी प्रोफिशिएंसी के प्रमाण के रूप में ज़रूरी होते हैं। जिसमे IELTS स्कोर 7 या उससे अधिक और TOEFL स्कोर 100 या उससे अधिक होना चाहिए।
      • विदेश यूनिवर्सिटीज में पढ़ने के लिए SOP, LOR, सीवी/रिज्यूमे और पोर्टफोलियो भी जमा करने की जरूरत होती है।

पॉलिटेक्निक करने के बाद सैलरी

पॉलिटेक्निक करने के बाद भारत में प्रोफेशनल्स की शुरुआती सैलरी लगभग Rs. 10,000 से Rs. 20,000 के बीच होती है। अगर आप कोर्स के दौरान बेहतरीन परफॉर्म करते हैं, तो कैंपस इंटरव्यू में ही आपको नौकरी के कई अच्छे ऑफर मिल सकते हैं। इसके अलावा आपके एक्सपीरियस के बाद भी आपकी सैलरी भी उसी तरह से बढ़ते रहती है।

उम्मीद करते हैं कि हमारे ब्लॉग पॉलिटेक्निक कोर्स  के बारे में आपको इससे जुड़ी तमाम जानकारी मिली होगी। अगर आप कोर्स करना चाहते हैं तो आज ही हमारे Apply Now के एक्सपर्ट्स के साथ अपनी फ्री सेशन बुक कीजिए।

 

पॉलिटेक्निक के सबसे बेहतरीन कोर्स
  • डिप्लोमा इन कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग
  • डिप्लोमा इन सिविल इंजीनियरिंग
  • डिप्लोमा इन इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग
  • डिप्लोमा इन मैकेनिकल इंजीनियरिंग
  • डिप्लोमा इन इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग
  • डिप्लोमा इन ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग
  • डिप्लोमा इन बायोटेक्नोलॉजी

12वीं के बाद पॉलिटेक्निक कोर्स 4 साल का है।

10वीं के बाद पॉलिटेक्निक कोर्स 3 साल का है।

पॉलिटेक्निक की शुरुआती सैलरी लगभग Rs. 10,000 से Rs. 20,000 के बीच होती है।

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